Heart attack: हार्ट अटैक से खुद को कैसे बचाए

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आज हम आपको जो जानकारी देने जा रहे हैं वह बहुत ही जरूरी है और कही भी काम आ सकती है। दरअसल आज हम आपसे (home treatment for heart attack in Hindi) यानी कि हार्ट अटैक के दौरान खुद को कैसे बचाए, के तरीके के बारे में बताने जा रहे हैं।

कभी आपने सोचा है कि यदि आपके पास पड़ोस, आपके ऑफिस या आपके घर में किसी को अचानक heart attack जाए तो आप क्या करेंगे? आपका सीधा सा जवाब होगा कि हम उसे तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाएंगे, परंतु कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि इतना समय नहीं होता कि patient को तुरंत अस्पताल ले जाया जा। सके ऐसी स्थिति में क्या कोई ऐसा तरीका है या क्या कोई ऐसी टेक्निक है जिसकी मदद से patient को बचाया जा सके तो इसका सीधा सा जवाब होगा कि ‘हां

जी हां दरअसल ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनकी मदद से आप अचानक आए हार्ट अटैक से खुद की एवं दूसरों की सुरक्षा कर सकते हैं। आपको यह थोड़ा सा असंभव वाली बात लग रही होगी परंतु आप इस खबर को पूरा करते रहिए क्योंकि इसे पढ़ने के बाद आपको पूरी तरह मालूम चल जाएगा कि हार्ट अटैक आने के बाद खुद की सुरक्षा कैसे करें एवं दूसरों की जान कैसे बचाएं।

कुछ ऐसे technic है जिसकी द से आप मरीज की जान बचा सकते हैं। आज के इस पोस्ट में उसी technic के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए समझने की कोशिश करते हैं और बिना समय गवाएं उस technic के पास चलते हैं जो किसी भी कंडीशन में Heart attack के बाद आप की रक्षा कर सकती है।

आज हम आपसे जिस टेक्निक के बारे में बात करने जा रहे हैं उसके लिए ना तो आपके डॉक्टर होने की जरूरत है और ना ही आपके पास किसी medical skill की जरूरत है। आप चाहे कहीं पर भी हो चाहे ऑफिस में हो, शॉप पर हो या गली मोहल्ले में हो यदि आपको कहीं भी हार्ट अटैक से पीड़ित मरीज दिखाई देता है तो आप तुरंत इस टेक्निक का यूज कर सकते हैं और उसका जीवन बचा सकते हैं।

Heart attack को कैसे पहचाने (how to identify heart attack in Hindi)

हार्ट अटैक कब कहाँ आ जाये इसके बारे में किसी को कुछ भी नही पता होता। यह ना तो समय देखता है और ना ही स्थान। लेकिन हार्ट अटैक आने से पूर्व कुछ लक्षण (heart attack symptoms) होते हैं जिससे आप यह समझ सकते हैं कि आपको हार्ट अटैक आ सकता है। जब भी कोई व्यक्ति सीने में अचानक दर्द के साथ गिरता हुआ दिखाई दे तो समझ जाइए कि उसे हार्ट अटैक आया है।

Heart attack के बाद क्या करें (What to do after the Heart Attack)

हार्ट अटैक आने के बाद  आपको दो स्थिति देखने को मिल सकती है।

  1. बुरी स्थिति
  2. बेहद बुरी स्थिति

1. बुरी स्थिति-

पहली बुरी स्थिति में ऐसा हो सकता है कि patient दर्द के साथ कराह रहा हो। आप तुरंत उस पेशेंट के पास जाए और पेशेंट आपसे यह शिकायत कर सकता है कि मुझे सीने में बहुत तेज दर्द हो रहा है और जो दर्द है वह सीने से होता हुआ कंधे के माध्यम से हाथ की तरफ जा रहा है। साथ ही पेशेंट को घबराहट और जी मिचलाना जैसे शिकायत हो सकती है। दोस्तों यह जो कंडीशन होती है इसे ही हम हार्ट अटैक कहते हैं

बुरी स्थिति में क्या करें

सबसे पहले आप पेशेंट को emidiately लिटाए एवं तुरंत 108 नंबर एंबुलेंस को फोन करें ताकि उसे तुरंत अस्पताल ले जाया जा सके। यदि पेशेंट कमरे में है तो जल्द से जल्द कमरे की सभी खिड़कियां खोल दें एवं AC वगैरह चालू कर दे क्योंकि हार्ट अटैक आने के बाद इतनी भयंकर गर्मी लगती है जो बर्दाश्त के बाहर होती है। सबसे बड़ी बात तो यह कि आप पेशेंट को याद दिलासा देते रहे कि उसे कुछ नहीं होगा।

2. बेहद बुरी स्थिति

अब यदि हमारे पास दूसरी यानी कि बेहद बुरी स्थिति है जिसमें पेशेंट बेहोश हो चुका है वह कुछ कहने की हालत में नहीं है। उसके नाड़ी पल्स वगैरा सब बंद हो चुके है तो इस स्थिति को हम cardiac arrest कहते हैं। कार्डियक अरेस्ट एक नहीं बल्कि कई कारणों से हो सकता है और उनमें से जो सबसे महत्वपूर्ण कारण है वह है हार्ट अटैक।

कार्डियक अरेस्ट इलेक्ट्रिक शॉक के वजह से भी हो सकता है और भी शरीर में ऐसी बहुत सी क्रियाएं होती हैं जिनकी वजह से कार्डियक अरेस्ट हो जाता है। यदि आपको cardiac arrest का patient मिलता है तो सबसे पहले आपको सीपीआर (CPR)करना है। जिसे मेडिकल भाषा में कार्डियो पल्मोनरी रेसिटेशन (cardio pulmonary resitiation) कहते हैं।

बेहद बुरी स्थिति में क्या करें

जब भी आप कार्डियक अरेस्ट के पेशेंट को पाए तो उसे सीधा लिटा दें। पेशेंट को सीधा लिटाने के बाद आप घुटने के बल बैठ जाए। इसके बाद आप सबसे पहले यह देखें कि क्या पेशेंट अभी बेहोश हुआ है या नहीं। पेशेंट की बेहोशी को चेक करने के लिए आप अपने हाथ को उसके सीने में गड़ा कर यह देख सकते हैं कि क्या उसे दर्द हो रहा है या नहीं?

अगर इससे आपको कोई रिजल्ट नहीं मिल रहा तो आप अपने अंगूठे एवं उसके साइड वाली उंगली को पेशेंट के आंख के कोनो में दबा कर देख सकते हैं। यदि पेशेंट कोई हलचल नहीं कर रहा है एवं किसी भी तरह का दर्द उसे महसूस नहीं हो रहा है तो आप उसके रेस्पिरेशन को चेक करें।

आप अपने गाल को उसके नाक के पास ले जाए और सीने को observe करें। यदि सांस नहीं आ रही है तो इसका मतलब पेशेंट clinical death की सिचुएशन में जा चुका है और इस पेशेंट को immediately CPR की जरूरत है।

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CPR देने के तरीके (step by step)

Step #1.कार्डियक अरेस्ट के पेशेंट को सीपीआर देने के लिए सबसे पहले आप पेशेंट के पास घुटनों के बल बैठ जाए।

Home treatment of heart attack

Step #2. अपनी हथेली को पेशेंट के सीने के बीचो बीच रखें एवं दूसरे हाथ को भी उसी के पास रखें आप हाथों को रखते हुए V shape का पोजीशन बनाएं।

Step #3. इस पोजीशन में आप की कोहनियां मुड़नी नहीं चाहिए। यह पोजीशन अंत तक एक बराबर बनी रहनी चाहिए।

Step #4. लगातार आपको पेशेंट के सीने पर प्रेशर करना है आप पेशेंट के सीने को इस तरह दबाए कि आपके दबाने की गति 1 मिनट में तकरीबन 100 बार के लगभग होनी चाहिए।

Step #5.  आप जितनी बार प्रेशर देंगे तो इस बात का ध्यान देना होगा कि आप की हथेली तकरीबन 5 सेंटीमीटर यानी कि डेढ़ इंच तक पेशेंट के सीने के अंदर जानी चाहिए।

Step #6. यह प्रेशर आपको तब तक लगातार देना है जब तक के पेशेंट को होश ना आ जाए और यदि आप इसे लगातार दे रहे हैं तो कुछ ही समय में पेशेंट को होश आ जाएगा।

Step #7. यदि आपको प्रेशर देते वक्त 10 मिनट का समय लगता है तो आप देते रहें। हां, यह बात हो सकती है कि आपको थकावट जरूर आ जाए परंतु किसी की जान बचाने के लिए 10 मिनट बिना थके आपको प्रेशर देते रहना है।

Step #8. इस तरह आपको लगभग 10 मिनट में 500 बार तक लगातार पम्पिंग करते रहना है। वैसे तो हार्ट अटैक के दौरान जान बचाने के आने के उपाय बताए जाते हैं परंतु वह सब किसी भी काम के नहीं होते। यदि इस तरीके को आजमा लिया जाए तो निश्चित तौर पर किसी भी इंसान की जान बचा जा सकती है।

तो इस पोस्ट में हमने आपको home treatment for heart attack in Hindi के बारे में सबकुछ बताया है कि आप कैसे जान बचा सकते हैं। आशा करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी।