about piles in hindi | जानिए आखिर क्या है बवासीर

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आइए आज हम सभी जानते हैं बवासीर के बारे में यानी कि (about piles in hindi कब्ज) मस्से, भगंदर, नासूर और बवासीर को जड़ से मिटाने का घरेलू उपाय। इस उपाय से जीवन में कभी भी इन समस्याओं से नहीं जूझना पड़ेगा। आजकल भागदौड़ और काम की वजह से यह जटिल रोग उत्पन्न होता है।

जानिए बवासीर के बारे में (About piles in Hindi)

आज के महंगाई के युग में और भौतिक साधनों की वजह से मनुष्य पैसा कमाने की जुगाड़ में अपने शरीर का ध्यान नहीं रख पाता है। बासी तला हुआ और फटाफट तैयार होने वाला भोजन खाना, सुबह व्यायाम ना करना, ऐसी बातों के लिए तो वक्त ही नहीं मिलता है।

पेट भर कमाने के लिए महानगरों में लोग बस रेल से दिन में 2 घंटे की दूरी तय कर अपने कार्यस्थल पर पहुंच जाते हैं। शुरुआत में कब्ज और मल के सूख जाने पर मस्सा बवासीर जैसे विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं। कब्ज बवासीर की बीमारी के शुरू होने का मुख्य कारण होता है।

About piles in hindi

अधिक मसालेदार के कारण पेट में कब्ज होने लगती है जो मल को अधिक शुष्क एवं कठोर करती है। इससे मल करते हुए अधिक जोर लगाना पड़ता है और नसों के छिल जाने पर बवासीर रोग हो जाता है। यह कई प्रकार का होता है जिनमें दो मुख्य है। तो चलिए जानते हैं every thing about piles in hindi…

1.खूनी बवासीर (Bloody piles)

2. बादी बवासीर (Plaintiff piles)

यदि मल के साथ खून बूंद बूंद करके आए तो उसे खूनी बवासीर (bloody piles) कहते हैं। यदि मलद्वार पर अथवा मलद्वार में सूजन मटर या अंगूर के दाने के समान हो और उससे मल के साथ खून ना आए तो उसे वादी बवासीर( plaintiff piles)  कहते हैं। बवासीर रोग में मलद्वार पर मांसाकुर के मुंहासे निकल आते हैं और उनमें शोत यानी की सूजन और जलन होने पर रोगी को अधिक पीड़ा होती है।

जितनी ज्यादा सूजन होगी उतनी ज्यादा पीड़ा होगी। सूजन होने पर मस्से में तेज दर्द होता है। बवासीर के चिकित्सा देर से करने पर मस्से पककर फूट जाते हैं और उनमें से खून इत्यादि निकलने लगता है।चलिए अब बवासीर के प्रकारों को जान लेते हैं।

बवासीर 6 प्रकार का होता है ( type of piles in hindi )

  1. पितार्ष
  2. कफार्ष
  3. वातार्ष
  4. सन्नी पातार्ष
  5. संसर्गार्ष
  6. रक्तार्ष यानी की खूनी बवासीर

कफार्ष बवासीर

कफार्ष बवासीर में मस्से काफी गहरे होते हैं। इन हवाओं में थोड़ी पीड़ा, चिकनाहट, गोलाई, कफ़ युक्त प्यूप तथा खुजली होती है। इस रोग के होने पर पतले पानी के समान दस्त होते हैं। इस रोग में त्वचा नाखून तथा आंखें पीले पड़ जाते हैं।

वातार्ष बवासीर

वातार्ष बवासीर में गुदा में मुरझाए हुए काले लाल रंग के मस्से, कुछ कड़े और अलग प्रकार के मस्से निकल आते हैं। इसका इलाज न करने से प्लीहा नामक बीमारी हो जाती है।

संसर्गार्ष बवासीर

इस प्रकार के रोग परंपरागत या किसी दूसरों के द्वारा हो जाते हैं। इसके कई प्रकार के लक्षण होते हैं। यदि आपके घर में आपके मम्मी पापा या दादा दादी किसी को भी बवासीर हुआ है तो संभावना है कि आप भी बवासीर से पीड़ित हो सकते हैं।

पितार्ष बवासीर

पितार्ष बवासीर में मस्सों के मुख्य रंग नीले, पीले, काले तथा लाल रंग के होते हैं। यानी कि यह काफी कलरफुल होते हैं। इनमें कच्चे एवं सड़े अनाज की दुर्गंध आती रहती है और मस्से से पतला खून निकलता रहता है। इस प्रकार के मस्से गर्म होते हैं। पितार्ष बवासीर में नीला, काला और लाल रंग का दस्त होता है।

सन्नी पातार्ष बवासीर

सन्निपात बवासीर में वातार्ष, पितार्ष, और काफार्ष बवासीर के लक्षण पाए जाते हैं। यानी कि इसमें तीनो के मिक्स लक्षण होते हैं।

रक्तार्ष बवासीर

इस बवासीर में मस्से चिरमटी या मूंग के आकार के होते हैं। मल के अधिक कठोर हो जाने पर पेट से बेहद ही दूषित खून निकलता है जिसके कारण पेट से निकलने वाली हवा रुक जाती है।

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बवासीर होने का प्रमुख कारण ( about main cause of piles in Hindi)

अगर हम बवासीर के उत्त्पत्ति की बात करें तो इसकी उत्पत्ति कब्ज के कारण होती है। जब कोई अधिक तेल मिर्च से बने हुए तथा अधिक मसालों के चटपटे खाद्य पदार्थ का अधिक सेवन करता है तो उसकी पाचन क्रिया खराब हो जाती है।

पाचन क्रिया खराब होने के कारण पेट में कब्ज बनती है जो पेट में सुखेपन की उत्पत्ति करके मल को अत्यधिक सूखा देती है। अधिक कठोर हो जाने पर शौच करते समय अधिक जोर लगाना पड़ता है।अधिक जोर लगाने से त्वचा छिल जाती है। जिसके कारण  मलद्वार में  काफी जख्म हो जाते हैं जो आगे चलकर मस्सों का रूप धारण कर लेते हैं।

फिर यही मस्से  लगातार संक्रमण होने की वजह से  ठीक नहीं हो पाते क्योंकि  इंसान के मलद्वार में काफी बेक्टेरिया पनपते हैं जो थोड़े से भी जख्म होने पर उसे ठीक नहीं होने देते। फिर यही से धीरे धीरे बवासीर की शुरुआत होती है।

बवासीर का शरीर पर प्रभाव (Effect of hemorrhoids on the body in hindi)

बवासीर शुरुआती दौर में  इंसानों  की समझ से परे होता है कि आखिर उन्हें  क्या हो गया है। गुप्त जगह होने पर  वह इस बात का जिक्र किसी से नहीं कर पाते। आपने इस कहावत को जरूर सुना होगा कि अक्सर बवासीर को एक ऐसी कैटेगरी में रखा गया है जिसके लिए एक कहावत कही जाती है कि जिसको बवासीर हो गया है  उसकी परेशानी “ ना किसी से कहा जाए और ना सहा जाए ” बवासीर को  चिकित्सा जगत में  बहुत ही  पेनफुल (painful) यानी कि कष्टदायक  रोग माना गया है।

आपको यकीन नहीं होगा कि जिस व्यक्ति को बवासीर (piles) हो जाता है उसकी जिंदगी किसी नर्क से कम नहीं होती। वह इंसान अपने मनपसंद के भोजन को नहीं खा सकता और तो और वह कहीं बाहर  भी जाने से कतराता है।

शादी विवाह हो या कोई अन्य कार्यक्रम, वह वहां पर नहीं जा सकता क्योंकि उसे हमेशा इस बात का डर बना रहता है कि यदि मैंने कुछ  खा लिया तो मुझे शौच (toilet) लगेगा एवं दर्द होगा। पता नहीं मैं जिस जगह जा रहा हूं वहां पर शौच करने का कोई  स्थान मौजूद है या नहीं?

दिमागी तौर से परेशान हो जाता है रोगी (Patients are mentally disturbed)

बवासीर से पीड़ित इंसान  खुद की नजरों मैं काफी  ग्लानि महसूस करता है  वह हमेशा दूसरों को देखकर यही सोचता है कि काश मैं भी इनके जैसा खुश हाल होता। वह हमेशा खाली समय या काम करते समय खुद की तुलना दूसरों के साथ करता रहता है। वह हमेशा यही सोचता है कि आखिर इस रोग की  बात को वह किसके साथ शेयर करें।

लेकिन हम आपसे यह कहना चाहते हैं कि  यह कोई बहुत बड़ा रोग नहीं है  और आज के समय में इससे करोड़ों लोग परेशान हैं। यदि आप भी इस रोग से परेशान है तो आज ही किसी डॉक्टर  के पास जाएं  एवं अपनी समस्या का  संपूर्ण समाधान  ले।

क्या बवासीर जानलेवा बीमारी है ( Is piles Genital illness in hindi) 

वैसे तो बवासीर  कोई जानलेवा बीमारी नहीं है परंतु कई मामलों में  इससे इंसान की मौत भी हो जाती है। जैसे कि यदि बवासीर काफी पुराना हो गया है एवं यह ठीक नहीं हो रहा हैं तो  गुदा द्वार  में गुदा कैंसर( Anal Cancer) होने की संभावना कई गुना तक बढ़ जाती है।  जिस वजह से  इंसान अपनी जान से हाथ धो बैठता है।

वहीं दूसरी तरफ  भोजन से परहेज करने पर इंसान का शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता जाता है और वह चिड़चिड़े पन का शिकार हो जाता है। और कभी कभी तो क्षय रोग से पीड़ित हो जाता है जिससे  उसकी जान चली जाती है।

बवासीर होने के लक्षणों को जान लीजिए

Piles होने पर मलद्वार के बाहर की ओर मांसाकुर निकल आते हैं। मस्से से खून शौच के साथ पतली रेखा के रूप में निकलता है। रोगी को चलने फिरने में परेशानी होना, पांव लड़खड़ाना, आंखों के सामने अंधेरा छाना तथा सिर में चक्कर आने लगना इत्यादि इसके लक्षण है। इस रोग के होने पर स्मरण शक्ति खत्म होने लगती है।

बवासीर के घरेलू उपाय

भगंदर, बवासीर और कब्ज का चमत्कारी घरेलू उपाय-  बवासीर के लिए आवश्यक 11 औषधियां चाहिए होंगी आपको, जो आप पंसारी की दुकान से खरीद सकते हैं-

आइए जानते हैं कि आखिर वो 11 औषधीया ( medicine) कौन कौन सी है। नागकेसर, बेलपत्र, बेलफल, चित्रक मूल, हरण काली मिर्च, सोंठ, कुटज, सुरन, जव्य, कंजली इन सभी औषधियों को ले आये और अच्छे से कूटकर बारीक करने के बाद शुद्ध जल के साथ सेवन करें। इन सभी औषधियों का सेवन दिन में 3 बार करना है जिसके बाद आपको जीवन में दोबारा कब्ज, भगंदर एवं मस्से जैसी समस्या से जूझना नही होगा।